(आशिफ खान संवाददाता झांसी)
नाव पलटने के बाद तेज बहाव में बहे महेंद्र और मनीष, एसडीआरएफ ने चलाया लंबा सर्च ऑपरेशन

झांसी/बरुआसागर। बेतवा नदी का तेज बहाव मंगलवार को एक परिवार पर कहर बनकर टूटा। बनगुवां गांव के पास मछली पकड़ने के दौरान नाव पलटने से दो सगे भाई गहरे पानी में समा गए। दोनों की तलाश में पुलिस और एसडीआरएफ ने करीब 30 घंटे तक नदी की खाक छानी। बुधवार को पहले छोटे भाई मनीष रायकवार (20) और करीब छह घंटे बाद बड़े भाई महेंद्र रायकवार (24) का शव घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर दूर बरामद हुआ। दोनों शव मिलते ही परिजनों की चीख-पुकार से नदी किनारा गमगीन हो गया।बरुआसागर के कटरा मोहल्ला निवासी राजू रायकवार ने बेतवा नदी में मछली पकड़ने का ठेका ले रखा है। मंगलवार सुबह करीब सात बजे वह अपने बेटों महेंद्र और मनीष के साथ नदी किनारे पहुंचे थे। राजू किसी काम में व्यस्त हो गए। इसी बीच दोनों भाई नाव लेकर नदी में उतर गए। बताया गया कि नदी का बहाव काफी तेज था। नाव बहते हुए गहरे पानी की ओर पहुंच गई। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से नाव पलट गई और दोनों भाई पानी में जा गिरे।पिता की आंखों के सामने बह गए दोनों बेटे।नाव पलटते ही राजू ने शोर मचाकर मदद की गुहार लगाई। आसपास मौजूद ग्रामीण नाव लेकर मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक दोनों भाई तेज बहाव की चपेट में आ चुके थे। पिता और दोनों बेटों को तैरना नहीं आता था। देखते ही देखते दोनों गहरे पानी में लापता हो गए। घटना की खबर फैलते ही नदी किनारे ग्रामीणों और परिजनों की भीड़ जुट गई।सूचना पर पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। मोटरबोट और अन्य संसाधनों की मदद से नदी में तलाशी अभियान शुरू किया गया। तेज बहाव, गहराई और नदी के फैलाव के कारण रेस्क्यू टीम को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। मंगलवार देर शाम तक अभियान चलाया गया, लेकिन अंधेरा होने के कारण तलाशी रोकनी पड़ी।सुबह मिली पहली खबर, फिर छह घंटे बाद दूसरा शवबुधवार सुबह करीब सात बजे सर्च ऑपरेशन दोबारा शुरू किया गया। काफी तलाश के बाद छोटे भाई मनीष का शव घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर दूर बरामद हुआ। परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि करीब छह घंटे बाद बड़े भाई महेंद्र का शव भी नदी किनारे मिल गया।दोनों शवों को बाहर निकालते ही परिवार की उम्मीद पूरी तरह टूट गई। पुलिस ने पंचनामा भरकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का सायामहेंद्र शादीशुदा था और उसके दो छोटे बच्चे हैं। पिता की मौत से दोनों मासूम बच्चों के सिर से हमेशा के लिए पिता का साया उठ गया। वहीं मनीष की मौत ने भी परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। एक ही हादसे में दो जवान बेटों को खोने वाले राजू रायकवार और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।परिजनों के मुताबिक, राजू ने दोनों बेटों को नाव लेकर नदी में जाने से मना किया था। कुछ देर बाद जब वह वापस लौटे तो दोनों नदी में जा चुके थे। उन्हें क्या पता था कि बेतवा का यही सफर परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन जाएगा।एक साथ दो जवान बेटों की मौत से कटरा मोहल्ले में मातम पसरा है। हर आंख नम है और हर जुबान पर एक ही सवाल—आखिर बेतवा का यह तेज बहाव एक परिवार की खुशियां क्यों बहा ले गया।

