(आशिफ खान संवाददाता झांसी)

गुदरी के बड़ागांव गेट स्थित मंदिर के नाम पर पुराने बकाये और ब्याज सहित जारी हुआ बिल, पार्षद निधि नीरज वर्मा ने उठाया मामला; अपर नगर आयुक्त बोले- बिल निरस्त कराने की कार्रवाई शुरू
झांसी। झांसी नगर निगम की कर निर्धारण प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। शहर के वार्ड संख्या 20 गुदरी के बड़ागांव गेट क्षेत्र में स्थित लगभग 60 साल पुराने हनुमान मंदिर के नाम पर नगर निगम द्वारा 976 रुपये का गृहकर बिल जारी किए जाने का मामला सामने आया है। मंदिर के नाम पर कर का नोटिस मिलने से मंदिर के मुख्य पुजारी उमाशंकर त्रिपाठी हैरान रह गए। मामला सामने आने के बाद क्षेत्रीय पार्षद निधि नीरज वर्मा ने नगर निगम के कर विभाग से संपर्क कर बिल निरस्त कराने की मांग उठाई। वहीं, नगर निगम प्रशासन ने भी मामले की जानकारी मिलने के बाद बिल निरस्त कराने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।
मंदिर के नाम पर 976 रुपये का बकाया, ब्याज भी शामिल
नगर निगम की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जारी गृहकर बिल में हनुमान मंदिर के नाम पर कुल 976 रुपये की धनराशि बकाया दर्शाई गई है। बिल के अनुसार, इसमें चालू वित्तीय वर्ष का 98 रुपये गृहकर, पुराने बकाये के रूप में 784 रुपये और 94 रुपये ब्याज शामिल हैं। इस तरह मंदिर के नाम पर कुल 976 रुपये जमा करने के लिए कहा गया है।
बिल में भवन का नाम ‘हनुमान जी का मंदिर’ दर्ज किया गया है। साथ ही कर निर्धारण की तिथि एक अप्रैल 2018 अंकित है। लगभग छह दशक पुराने धार्मिक स्थल के नाम पर गृहकर बिल जारी होने की जानकारी सामने आने के बाद नगर निगम की संपत्ति सर्वेक्षण और कर निर्धारण प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
पुजारी ने पार्षद को दी जानकारी
मंदिर के मुख्य पुजारी उमाशंकर त्रिपाठी को जब गृहकर बिल मिला तो उन्होंने इस संबंध में क्षेत्रीय पार्षद निधि नीरज वर्मा को अवगत कराया। पुजारी से जानकारी मिलने के बाद पार्षद ने नगर निगम के कर अधिकारी से फोन पर बातचीत की और मंदिर के नाम पर जारी बिल को निरस्त करने की मांग की।
मामले में पार्षद की ओर से हस्तक्षेप किए जाने के बाद नगर निगम प्रशासन तक यह प्रकरण पहुंचा। अब नगर निगम की ओर से बिल निरस्त कराने की कार्रवाई शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है।
धार्मिक स्थलों को गृहकर से छूट का प्रावधान
सार्वजनिक पूजा-अर्चना और धर्मार्थ कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाली संपत्तियों को नियमानुसार निर्धारित शर्तों के अधीन सामान्य कर यानी गृहकर से छूट मिल सकती है। ऐसे में हनुमान मंदिर के नाम पर बिल जारी होने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या जीआईएस सर्वे और कर निर्धारण के दौरान संबंधित संपत्ति की प्रकृति का उचित सत्यापन किया गया था।
नगर निगम में जीआईएस सर्वे के बाद संपत्तियों का विवरण दर्ज कर गृहकर बिल जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में यह मामला कर निर्धारण से पहले संपत्तियों की सही पहचान और उनके उपयोग का सत्यापन किए जाने की आवश्यकता को भी सामने लाता है। हालांकि, इस प्रकरण में बिल जारी होने के कारणों और कर निर्धारण की प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी नगर निगम की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अपर नगर आयुक्त ने कही बिल निरस्त कराने की बात
मामले को लेकर अपर नगर आयुक्त राहुल कुमार यादव ने बताया कि जीआईएस सर्वे के बाद गृहकर बिलों का वितरण किया जा रहा है। मंदिर के नाम पर गृहकर बिल जारी होने की जानकारी कर विभाग को मिल गई है। उन्होंने कहा कि बिल निरस्त कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
कार्रवाई पर टिकी निगाहें
लगभग 60 साल पुराने हनुमान मंदिर के नाम पर गृहकर बिल जारी होने का यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अब लोगों की निगाहें नगर निगम की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मंदिर के नाम पर जारी बिल को कब तक निरस्त किया जाता है और भविष्य में इस प्रकार की स्थिति से बचने के लिए कर निर्धारण प्रक्रिया में क्या सुधार किए जाते हैं।

