15 सालों से चाय विक्रेता लापता, सीजेएम कोर्ट बाराबंकी के आदेश पर दर्ज होगा हत्या का एफआईआर

24 में 2020 को विपक्षियों वादी से कहा था तुम्हारे चाचा को मारकर शव किया गायब, उसी तरह तुम्हारी भी करूँगा हत्या, डर के कारण वादी लखनऊ में रहकर करता है पैरवी

डॉ अंशुमान सिंह

बाराबंकी/अयोध्या।

मामला अयोध्या मंडल के बाराबंकी जिले से है।बाराबंकी जनपद के असंद्रा के टिकरा बबुआन गांव निवासी श्रवण कुमार तिवारी के चाचा रामसरन उर्फ बेचू करीब 15 साल से लापता हैं। सीजेएम की अदालत ने श्रवण की अर्जी पर सुनवाई करते हुए गांव के ही चार लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया है।श्रवण ने अदालत को बताया कि उनके चाचा बीकानेर में चाय की दुकान चलाते थे। 25 साल पहले जनवरी 2005 में वह गांव आए थे। इसी दौरान गांव के हरि नारायण तिवारी, प्रयाग नारायण उर्फ गुड्डू, धर्मेश तिवारी और संतोष कुमार साथ में बीकानेर गए थे चाय विक्रेता, सीजेएम कोर्ट का आदेश तिवारी उनके घर पहुंचे और चाचा से साथ बीकानेर चलने की बात कही। चारों उनके चाचा के साथ बीकानेर चले गए, लेकिन कुछ दिन बाद रामशरण वापस नहीं लौटे। आरोपियों से पूछने पर उन्होंने बताया कि वह अलग हो गए थे। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन रामसरन का कोई पता नहीं चला। श्रवण के मुताबिक 24 मई 2020 की रात पेड़ को लेकर हुए विवाद के दौरान विपक्षियों ने उनसे कहा कि उनके चाचा की हत्या कर शव गायब कर दिया गया है और इसी तरह उसकी भी हत्या कर देंगे। इस पर श्रवण ने न्यायालय की शरण ली थी। नौ अक्तूबर 2020 को अदालत ने यह कहते हुए प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया था कि वह महज आशंका के आधार पर अर्जी दी जा रही है। अब मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शांभवी यादव ने संबंधित असंद्रा थानाध्यक्ष को हत्या का मामला दर्ज कर विवेचना करने के आदेश दिए हैं।इस संबंध में थानाध्यक्ष असंद्रा से दूरभाषी यंत्र के माध्यम से वार्ता की गई तो उन्होने बताया कि मामला 15 साल पुराना है, माननीय न्यायालय का आदेश आ चुका है अनुपालन में आज एफआईआर दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कराया जाएगा। वहीं पीड़ित श्रवण तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि 4-5 दिन हो गए हैं अदालत से आदेश हुए लेकिन पुलिस एफआईआर दर्ज नही कर रही विपक्षी दबंग मै घर का अकेला हूँ मेरे भाई लोग अपनी संपत्ति बेचकर बाहर रहते हैं इसलिए विपक्षियों के डर से हम भी लखनऊ में रहते हैं और लगातार 6 साल से मामले की पैरवी कर रहा हूँ एक बार हमारा मामला अदालत ने खारिज भी कर दिया था, फिर से न्याय की उम्मीद में माननीय न्यायालय में मामला दाखिल किया तब जाकर 6 साल बाद अब आदेश हुआ है।