शिक्षा व्यवस्था में सुधार और आरक्षण नीति की समयबद्ध समीक्षा की मांग, प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

(आशिफ खान संवाददाता झांसी)

झांसी। शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा आरक्षण व्यवस्था की समयबद्ध समीक्षा की मांग को लेकर हिन्दू-मुस्लिम एकता समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक मोहम्मद इमरान खान ने प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा है।

ज्ञापन स्पीड पोस्ट के माध्यम से प्रेषित करते हुए केंद्र सरकार का ध्यान शिक्षा, सामाजिक न्याय और समान अवसर से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की ओर आकर्षित किया गया है।ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 46 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि संविधान समानता, अवसर और समाज के कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा का प्रावधान करता है।

वर्तमान समय में बड़ी संख्या में ऐसे मेधावी और परिश्रमी विद्यार्थी हैं, जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग, पुस्तकालय, डिजिटल संसाधन तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाते। आर्थिक संसाधनों के अभाव में प्रतिभाशाली युवाओं की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाना शिक्षा व्यवस्था के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद इमरान खान ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था से संबंधित उनकी मांग किसी जाति, धर्म या वर्ग के विरोध में नहीं है। उनका कहना है कि सामाजिक न्याय की व्यवस्था के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सरकारी योजनाओं और उपलब्ध सुविधाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंद एवं वंचित लोगों तक पहुंचे। उन्होंने आरक्षण नीति की समय-समय पर समीक्षा किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि बदलती सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नीतियों का प्रभावी मूल्यांकन किया जा सके।

आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को मिले बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं

ज्ञापन में मांग की गई है कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए प्रारंभिक स्तर से ही गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था को मजबूत किया जाए। इसके अलावा जरूरतमंद छात्रों को निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग, छात्रावास, पुस्तकालय, अध्ययन सामग्री और डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, जिससे आर्थिक स्थिति किसी विद्यार्थी की शिक्षा और भविष्य के अवसरों में बाधा न बने।ज्ञापन में यह भी कहा गया कि आरक्षण नीति की संविधान की मूल भावना और सामाजिक न्याय के उद्देश्य के अनुरूप समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। समिति ने सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक न्याय को भी महत्व देने तथा जरूरतमंद वर्गों तक सरकारी सहायता पहुंचाने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की मांग रखी है।

योग्य युवाओं को समान अवसर देने पर जोर

मोहम्मद इमरान खान ने कहा कि वर्ष 2026 के डिजिटल भारत में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के क्षेत्र में तकनीक एवं संसाधनों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि देश के विकास में प्रत्येक वर्ग की भूमिका रही है और प्रतिभा को अवसर मिलना राष्ट्र की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने केंद्र सरकार से ज्ञापन में उठाए गए बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करने तथा शिक्षा व्यवस्था में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए सुविधाओं का विस्तार करने की मांग की। साथ ही आरक्षण एवं कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता की समय-समय पर समीक्षा कर यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सके।समिति ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार शिक्षा, समान अवसर और सामाजिक न्याय से जुड़े इन सुझावों पर विचार करते हुए आवश्यक नीतिगत कदम उठाएगी।