ई-रिक्शा के संचालन और नियंत्रण को लेकर हाईकोर्ट सख्त

बढ़ती संख्या से बिगड़ रही यातायात व्यवस्था, बिक्री-पंजीकरण पर नियंत्रण की तैयारी

लखनऊ। शहरों में लगातार बढ़ती ई-रिक्शा की संख्या और इससे प्रभावित हो रही यातायात व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सड़कों पर ई-रिक्शा की बढ़ती भीड़ के कारण जगह-जगह जाम की समस्या सामने आ रही है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ई-रिक्शा के संचालन को व्यवस्थित करने के लिए मोटरयान अधिनियम की धारा 65 में संशोधन की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही ई-रिक्शा की बिक्री और पंजीकरण पर नियंत्रण के उपायों पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि बड़े शहरों में इनकी संख्या को जरूरत के अनुरूप सीमित किया जा सके।

यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन के स्तर पर भी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। ई-रिक्शा के संचालन, पंजीकरण और निर्धारित मार्गों को लेकर नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए संयुक्त अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है।

प्रशासन का उद्देश्य ई-रिक्शा संचालन को पूरी तरह बंद करना नहीं, बल्कि उनकी संख्या और संचालन को इस तरह नियंत्रित करना है कि यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे और आम लोगों को जाम की समस्या से राहत मिल सके। आने वाले दिनों में नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई और यातायात व्यवस्था के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाए जाने की संभावना है