उजयान घाट पर नाव बंद, 15 गांवों का संपर्क प्रभावित; 200 बच्चों की पढ़ाई पर असर,

(आशिफ खान संवाददाता झांसी)

पूर्व मंत्री प्रदीप जैन के साथ सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे, डीएम से नाव संचालन बहाल कराने की मांग

झांसी। बड़ागांव क्षेत्र के उजयान घाट पर बेतवा नदी में नाव का संचालन बंद होने से करीब 10 से 15 गांवों के ग्रामीणों के सामने आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नाव सेवा बंद होने का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, दैनिक मजदूरों और ग्रामीणों पर पड़ रहा है। समस्या को लेकर पिछड़ा वर्ग कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष लोकेन्द्र सिंह यादव के नेतृत्व में पूर्व मंत्री प्रदीप जैन आदित्य के साथ सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल नाव सेवा शुरू कराने की मांग की।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष लोकेन्द्र सिंह यादव ने बताया कि उजयान घाट लंबे समय से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। उजयान, पच्चरगढ़, इटौरा, खडेसर सहित करीब 10-15 गांवों के लोग बेतवा नदी पार करने के लिए इसी घाट पर निर्भर रहे हैं। उनका कहना है कि पूर्व में नोटघाट, रामनगर और धमना पुल उपलब्ध नहीं होने के कारण यह घाट ग्रामीणों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग का काम करता था।उन्होंने बताया कि क्षेत्र में पीपा पुल बनने के बाद ग्रामीणों को आवागमन में कुछ राहत मिली, लेकिन 15 जून से 15 अक्टूबर तक पीपा पुल बंद रहने की स्थिति में नदी पार करने के लिए नाव ही सबसे महत्वपूर्ण विकल्प रह जाती है। आरोप है कि 27 जुलाई 2026 से प्रशासन द्वारा नाव का संचालन बंद करा दिया गया, जिसके बाद से ग्रामीणों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।

नाव बंद होने से करीब 200 स्कूली बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का दावा किया गया है। ये बच्चे बड़ागांव और चिरगांव क्षेत्र के विद्यालयों में पढ़ने जाते हैं, लेकिन नदी पार करने की सुविधा नहीं होने के कारण नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। वहीं पारीछा पावर प्लांट में काम करने वाले दैनिक मजदूरों को भी अपने कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए करीब 50 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।लोकेन्द्र सिंह यादव ने कहा कि 5 सितंबर 1995 को उजयान घाट पर हुई नाव दुर्घटना में 22 लोगों की जान चली गई थी, इसके बावजूद उस समय भी ग्रामीणों के आवागमन को पूरी तरह बंद नहीं किया गया था। उनका कहना है कि वर्तमान में नाव बंद करने से पहले ग्रामीणों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित किया जाना जरूरी था।

कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि प्रशासन सुरक्षा मानकों के साथ नाव संचालन की अनुमति दे। नाव में क्षमता के अनुसार सीमित यात्रियों को बैठाया जाए, सभी यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट की व्यवस्था हो और प्रशिक्षित नाविकों की निगरानी में संचालन कराया जाए। यदि नाव संचालन संभव नहीं है तो प्रशासन द्वारा स्टीमर की व्यवस्था कर नदी के दोनों किनारों के बीच आवागमन बहाल किया जाए।कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने बताया कि ग्रामीणों की समस्या को लेकर 16 सितंबर को क्षेत्रीय पंचायत आयोजित की जाएगी। इसमें प्रभावित गांवों के ग्रामीणों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन से मांग की है कि बच्चों की शिक्षा और ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों को देखते हुए मामले में तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए।