Author: Success Media
*बजरंग बली की शक्ति देख प्रशासन हुआ नतमस्तक, नहीं हटेगी मूर्ति* धर्म नगरी उज्जैन में 150 साल पुरानी प्रसिद्ध खड़े हनुमान जी की प्रतिमा चर्चा का विषय बन गई, सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रशासन ने मंदिर को हटाने की कोशिश की थी, लेकिन प्रतिमा हटाई नहीं जा सकी. अब मंदिर में पूजा के लिया हजारों की भीड़ जुट रही है, इस बीच प्रशासन ने बयान जारी करते हुए प्रशासन ने कहा है कि श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और प्रतिमा की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. बिना विशेषज्ञों की जांच और संत समाज की सहमति के प्रतिमा को स्थानांतरित नहीं किया जाएगा.
सब-इंस्पेक्टर के बाद लेखपाल बनीं मौसम शुक्लाग्रामीण परिवेश की बेटी ने लगातार दो प्रतियोगी परीक्षाओं में हासिल की सफलता, क्षेत्र का बढ़ाया मानरुदौली, अयोध्या।आदर्श नगर पंचायत मां कामाख्या धाम के शुकुल पुरवा गांव की मेधावी बेटी मौसम शुक्ला ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर एक बार फिर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। सब-इंस्पेक्टर पद पर चयनित होने के बाद अब मौसम शुक्ला ने लेखपाल भर्ती परीक्षा में भी सफलता हासिल की है।मौसम शुक्ला क्षेत्र के सम्मानित व्यक्ति राजेंद्र कुमार शुक्ला की सुपुत्री हैं। ग्रामीण परिवेश से निकलकर लगातार दो महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करना उनकी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।मौसम शुक्ला की इस दोहरी सफलता से उनके परिवार के साथ-साथ पूरे शुकुल पुरवा और मां कामाख्या धाम क्षेत्र में खुशी का माहौल है। उनकी उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्र के उन युवाओं के लिए प्रेरणा बनी है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर मेहनत कर रहे हैं।मौसम शुक्ला ने अपनी सफलता से यह संदेश दिया है कि प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने ग्रामीण परिवेश कोई बाधा नहीं है। उनकी इस उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों, शुभचिंतकों और परिचितों ने उन्हें तथा उनके परिवार को बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।
तीन हजार आवेदन, चार सौ चयन… बाकी आवेदक पूछ रहे—‘भाई, हमारी फाइल किस गली में घूम रही है?’
अंबेडकरनगर।ओडीओपी और पीएम विश्वकर्मा योजना में लाभार्थियों के चयन को लेकर इन दिनों खूब चर्चा है। करीब तीन हजार आवेदक मैदान में उतरे, लेकिन चयन की बारी आई तो लगभग…
*इटौंजा में गोमती का कहर जारी प्रशासन अलर्ट मोड पर, डीएम विशाख जी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षण*लखनऊ/इटौंजा। गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर के चलते बख्शी का तालाब तहसील क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। सुल्तानपुर, बहादुरपुर, हीरापुरवा लासा, अकडरिया, करौंदी,आदि दर्जनों गांव बाढ़ प्रभावित बताए जा रहे हैं।बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शुक्ला उर्फ तिरंगा महाराज की मांग पर जिलाधिकारी लखनऊ विशाख जी (आईएएस) ने गोमती नदी के किनारे स्थित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान एडीएम राकेश सिंह सीडीओ डाक्टर सुरेश कुमार एसडीएम बीकेटी, आकाश कुमार तहसीलदार, शरद सिंह सिंचाई, लोक निर्माण विभाग, पशुपालन, स्वास्थ्य, ब्लॉक, राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। इटौंजा थाना प्रभारी सोबरन सिंह मय पुलिस बल के साथ सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था संभालते रहे।*किसानों के सामने फसल बर्बादी का संकट*तिरंगा महराज के अनुसार बाढ़ के पानी से बड़े क्षेत्र में धान, उड़द और सब्जियों की फसल प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर खेत पूरी तरह जलमग्न हैं। किसानों ने प्रशासन से फसल क्षति का सर्वे कराकर मुआवजा और फसल बीमा का लाभ दिलाने की मांग की है।इसके अलावा कई गांवों में आवागमन प्रभावित है। सुल्तानपुर-बहादुरपुर मार्ग पर पानी भरने से ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।*स्वास्थ्य और पशुओं को लेकर भी चिंता*जलभराव के कारण ग्रामीणों में बुखार, डायरिया, त्वचा संबंधी बीमारी समेत अन्य संक्रमणों का खतरा बढ़ गया है। वहीं पशुओं के लिए चारे और सुरक्षित स्थान की समस्या भी सामने आई है। पानी बढ़ने के कारण जहरीले जीव जंतुओं के आबादी वाले क्षेत्रों में आने की आशंका से ग्रामीणों में भय का माहौल है। कुछ प्रभावित गांवों में बिजली आपूर्ति और शिक्षण व्यवस्था भी प्रभावित होने की जानकारी ग्रामीणों ने प्रशासन को दी।प्रशासन ने तेज किए राहत एवं बचाव के प्रयास निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी नेअधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने तथा ग्रामीणों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में नाव की व्यवस्था शुरू करने पशुओं के लिए चिकित्सा शिविर लगाने, चारे की व्यवस्था करने तथा ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है।*सुल्तानपुर-बहादुरपुर मार्ग का भी डीएम ने जायजा लिया। इस दौरान तिरंगा महाराज ने डाट-पुलिया और सड़क की समस्या जिलाधिकारी के सामने रखी*। जिलाधिकारी ने बारिश के बाद लासा गांव की तर्ज पर सड़क को ऊंचा कराने तथा उपलब्ध प्रशासनिक प्रावधानों के तहत निर्माण की संभावना पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।*फसल बीमा को लेकर भी उठी मांग*बाढ़ से प्रभावित किसानों की फसल बीमा संबंधी समस्या भी निरीक्षण के दौरान उठाई गई। तिरंगा महाराज ने किसानों के हित में फसल बीमा कराने की मांग रखी। प्रशासन की ओर से सोमवार तक संबंधित किसानों के दस्तावेज जुटाने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है।*पुलिस प्रशासन ने भी प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है* थाना प्रभारी सोबरन सिंह ने बताया अराजक तत्वों पर नजर रखने के साथ ओवरलोडिंग जोखिमपूर्ण आवागमन को रोकने के लिए पेट्रोलिंग की जा रही है ड्यूटी लगा दी गई है *ग्रामीणों ने जताया आभार*प्रशासनिक टीम के गांवों में पहुंचने और समस्याओं का मौके पर जायजा लेने पर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी समेत अधिकारियों और तिरंगा महाराज के प्रति आभार जताया। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ की स्थिति में प्रशासन की सक्रियता से राहत एवं बचाव कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।तिरंगा महाराज ने कहा,आपदा की इस घड़ी में हम, हमारा भाजपा परिवार और समस्त पत्रकार बंधु पीड़ित किसानों और ग्रामीणों के साथ खड़े हैं। यह समय राजनीति करने का नहीं, बल्कि मानवता की मिसाल पेश करने और जरूरतमंद लोगों की मदद करने का है। हमारी प्राथमिकता है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों, किसानों और पशुपालकों की समस्याएं प्रशासन तक पहुंचें और उनका यथासंभव शीघ्र समाधान हो।प्रशासन ने ग्रामीणों से नदी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक जोखिम न लेने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की अपील की है।
*अलकायदा से जुड़ा आतंकी आजमगढ़ से गिरफ्तार, यूपी एटीएस ने नाकाम की बड़ी साजिश**योगी सरकार में आतंक के खिलाफ शिकंजा और कसा, एक्यूआईएस से जुड़े नेटवर्क हुआ, खुलासा*जम्मू-कश्मीर समेत देश-विदेश को लोगों को अपने साथ जोड़ा, पाकिस्तान में ट्रेनिंग की कर रहा था तैयारी**लोगों से साझा कर रहा था आतंकी विचारधारा से जुड़ी सामग्री और बम बनाने का तरीका**आतंकियों की दो किताबों को पढ़ने के लिए कर रहा था प्रेरित, युवाओं को बनाया निशाना**लखनऊ, 12 सितंबर।* योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आतंकवाद और कट्टरपंथी नेटवर्क के खिलाफ लगातार कड़ा शिकंजा कस रहा है। इसी अभियान में यूपी एटीएस ने आजमगढ़ से 19 वर्षीय मोहम्मद नबील को गिरफ्तार कर एक्यूआईएस (अलकायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट) से जुड़े कथित नेटवर्क का खुलासा किया है। नबील सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ग्रुप्स के जरिए जम्मू कश्मीर समेत देश व विदेश के विभिन्न हिस्सों से युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने, उन्हें जेहाद के लिए तैयार करने और धन जुटाने कोशिश कर रहा था। वह पाकिस्तान की मदद से देश में हिंसक गतिविधियों और गजवा-ए-हिंद की साजिश भी रच रहा था।*एक्यूआईएस की विचारधारा फैलाकर युवाओं को जोड़ा*यूपी एटीएस के मुताबिक, आजमगढ़ के दीदारगंज थाना क्षेत्र में रहने वाला मोहम्मद नबील प्रतिबंधित आतंकी संगठन एक्यूआईएस की विचारधारा को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित और प्रसारित कर रहा था। वह युवाओं को आतंकी समूह से जोड़ने, उन्हें जेहाद के लिए तैयार करने और इसके लिए धन जुटाने की कोशिश कर रहा था।नबील सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बनाए गए कई एन्क्रिप्टेड ग्रुप के जरिए भारत के साथ-साथ दूसरे देशों के लोगों को भी जोड़ रहा था। इन ऑनलाइन ग्रुप के माध्यम से आतंकी विचारधारा से संबंधित सामग्री साझा किए जाने की बात की भी जांच में पुष्टि हुई है।*‘ला गालिब-इलल्लाह’ नाम से व्हाट्सएप ग्रुप*नबील के मोबाइल की जांच में ‘ला गालिब-इलल्लाह’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप मिला। जांच में यह भी सामने आया कि नबील जेहाद, चाकू, केमिकल और प्लान जैसे शब्दों के लिए ट्रिप, पेन, जूस और प्रोजेक्ट जैसे कोडवर्ड का इस्तेमाल कर साजिश रच रहा था। एटीएस इन कोडवर्ड और ग्रुप में हुई बातचीत के आधार पर नेटवर्क की गतिविधियों की पड़ताल कर रही है।*‘जेहाद करने के 44 तरीके’ समेत अन्य किताबों का जिक्र*एटीएस की जांच में कई किताबों का भी जिक्र सामने आया है। इनमें ‘जेहाद करने के 44 तरीके’ नाम की किताब शामिल है, जिसे अलकायदा के आतंकी अनवर उल अवलाकी ने लिखा है। इसके अलावा एक्यूआईएस के पूर्व प्रमुख और आतंकी मौलाना आसिम उमर की लिखी ‘तीसरी जंग-ए-अजीम और दज्जाल’ किताब का भी जिक्र सामने आया है। एटीएस के मुताबिक, नबील ने ग्रुप में इन किताबों को प्रसारित किया और सदस्यों से इन्हें पढ़ने की अपील भी की।*जम्मू-कश्मीर के लोगों को जोड़कर गजवा-ए-हिंद की तैयारी*नबील जम्मू-कश्मीर समेत देश के अन्य हिस्सों से लोगों को अपने साथ जोड़ रहा था। उसका मकसद इन लोगों के जरिए पाकिस्तान की मदद से देश में बड़ी हिंसक घटना को अंजाम देने की दिशा में आगे बढ़ना था। जांच के मुताबिक, नबील पाकिस्तान की मदद से भारत में गजवा-ए-हिंद की योजना पर भी काम कर रहा था।*‘फ्लेम्स ऑफ वॉर’ ग्रुप में बांग्लादेश, म्यांमार और सऊदी अरब के लोग*नबील ‘फ्लेम्स ऑफ वॉर’ नाम के व्हाट्सऐप ग्रुप से भी जुड़ा था। जांच एजेंसी के अनुसार, इस ग्रुप में बांग्लादेश, म्यांमार और सऊदी अरब के लोग भी जुड़े हुए थे। एटीएस का कहना है कि इस ग्रुप में आतंकी संगठन अलकायदा की विचारधारा से संबंधित सामग्री लगातार साझा की जा रही थी। *पाकिस्तान में ट्रेनिंग कराने की थी योजना*जांच में नबील की कथित गतिविधियों का एक और गंभीर पहलू सामने आया है। वह कई ऑनलाइन ग्रुप में शामिल होकर लोगों को पाकिस्तान, तुर्की और बांग्लादेश जाकर अपने मकसद को पूरा करने के लिए प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित कर रहा था।नबील पाकिस्तान समेत अन्य स्थानों पर लोगों को बम बनाने की ट्रेनिंग दिलाने की योजना बना रहा था। उसने ग्रुप में बम बनाने के तरीकों से संबंधित वीडियो भी साझा किए थे। इसके साथ ही पोटैशियम नाइट्रेट हासिल करने के तरीकों से संबंधित जानकारी साझा किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
*संसद में यही सवाल उठेगा—हजारों करोड़ खर्च हुए, आपात की ट्रॉली सांसद क्यों लाए?*लखनऊ/ रायबरेली में राहुल गांधी ने जो हरी झंडी दिखाई, वह अब सिर्फ जोन की नाकामी नहीं रह गई। वह प्रदेश की भाजपा सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार दोनों के लिए संसद का कठिन सवाल बन सकती है। नौ सितंबर दो हजार छब्बीस को लोकसभा में विपक्ष के नेता और रायबरेली सांसद राहुल गांधी ने सांसद निधि से दो चलित ट्रांसफार्मर—करीब इक्कीस लाख रुपये—और दो रोगी वाहन सौंपे। खरीद विभाग के जरिए हुई। मशीन विभाग के सामने खड़ी रही। कैमरा विपक्ष के पास चला गया। संदेश यही गया कि सरकार नहीं दे सकी, सांसद को अपनी निधि से करनी पड़ी। अगर राहुल गांधी यही दृश्य संसद में रख दें, तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा क्या जवाब देंगे? कि हजारों करोड़ की योजनाओं के बावजूद आपात काल की समुचित व्यवस्था नहीं थी?यह सवाल तीखा इसलिए है क्योंकि चलित ट्रॉली वाला ट्रांसफार्मर आपात के लिए होता है और इसे विभाग स्वयं खरीदता है। जला ट्रांसफार्मर आने तक गांव की रोशनी बचाने की मशीन है। कार्य योजना में इसके लिए राशि निकलती है। भंडार में इसके लिए मांग लगती है। यह सांसद का खिलौना नहीं, वितरण निगम का औजार है। रायबरेली जोन के मुख्य अभियंता को यह मालूम था। मालूम होने के बाद भी आपात की ट्रॉली सांसद निधि की झंडी बन गई। पहली गलती यही है। विभाग खरीदता है—यह मूल नियम भूल गए, तो विपक्ष को मंच मिल गया।अब कल्पना कीजिए संसद का दृश्य। नेता प्रतिपक्ष पूछें—पुनर्गठन और सुधार की योजनाओं पर करोड़ों खर्च हुए, फिर रायबरेली में आपात ट्रॉली उनके कार्यालय से क्यों नहीं आई? सांसद निधि से क्यों आईं? ऊर्जा मंत्री कहेंगे कि मशीन विभाग ने भी खरीदी है, भंडार में मांग लगी थी, कार्य योजना स्वीकृत थी। तब दूसरा सवाल और तेज होगा—अगर विभाग खरीदता है, भंडार है, योजना है, तो हरी झंडी सांसद के हाथ में क्यों थी? मुख्यमंत्री कहेंगे कि एक-दो मशीन से पूरी व्यवस्था नहीं नापी जाती। तब तीसरा सवाल आएगा—व्यवस्था नापने की बात छोड़िए, आपात की ट्रॉली तो रोजमर्रा का औजार है। वह भी सांसद निधि से आ जाए, तो हजारों करोड़ की योजनाओं का दावा संसद में कैसे टिकेगा? केंद्र की सरकार पर भी वही छींटा पड़ेगा। वितरण सुधार की राष्ट्रीय योजनाएं केंद्र से चलती हैं। राज्य उन्हें मैदान में लागू करता है। दोनों के बीच खाली जगह को राहुल गांधी अपनी निधि से भरते दिखें, तो भाजपा की दोनों सरकारों की छवि एक साथ कटती है।यहीं मुख्य अभियंता की दूसरी गलती खुलती है। रायबरेली में ट्रांसफार्मर जलना, तार टूटना, गर्मी में गांवों का अंधेरा दर्ज शिकायतें हैं। सलोन की कटौती पर विधायक प्रबंध निदेशक तक गए। जिलाधिकारी ने क्षतिग्रस्त मशीन समय पर बदलने को कहा। विभाग ने खुद लिखा कि ट्रांसफार्मर कार्य योजना में स्वीकृत है, भंडार में मांग लगी है। फिर भी मुख्य अभियंता ने न अपनी योजना से पहले मशीन लगाई, न ऐलान होते ही फाइल मंत्री तक पहुंचाई। अगर जोन ने आपात के लिए राशि पहले ले ली थी, तो दोहरी व्यवस्था क्यों? एक राशि दफ्तर में, दूसरी मंच पर? अगर राशि नहीं ली थी, तो भंडार खाली क्यों रहा? दोनों हाल में जवाब लखनऊ के पास नहीं, जोन के पास अटकता है। संसद में यही अटकना सरकार का जवाब बन जाएगा।इसी बीच वह खबर आती है, जिसे दफ्तर दबाना चाहता है। पद-विस्तारण।प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल ने आदेश दिया था—गृहजनपद में तैनाती मना है। मकसद था अपने घर-जिले का गढ़ तोड़ना। आरोप है कि रायबरेली जोन के मुख्य अभियंता उसी आदेश को ताक पर रखकर अपने लोगों का पद बढ़ा रहे हैं, उन्हें पसंदीदा जगह बैठा रहे हैं और कठिन क्षेत्र से बचाए रख रहे हैं। नवंबर दो हजार पच्चीस की समीक्षा के बाद जोन के दोनों अधीक्षण अभियंता हटे भी थे। सख्ती ऊपर दिखी। नीचे खेल नहीं थमा। जो कुर्सी आपात भंडार देखने के लिए थी, वह कुर्सी बढ़ाने के काम आ गई। गृहजनपद पर रोक कागज पर रही। पद-विस्तारण मैदान में चला। तीसरी गलती यही है—आदेश की अवहेलना। आपात की फाइल पीछे रही, अपने लोगों की फाइल आगे रही। तभी राहुल गांधी को वह मंच मिला, जो विभाग का होना चाहिए था। संसद में अगर यही जोड़ दिया जाए—आपात की ट्रॉली विभाग खरीदता है, फिर भी सांसद लाए, क्योंकि मुख्य अभियंता पद बढ़ाने में व्यस्त थे—तो छीछालेदर और गहरी होगी।दस सितंबर को सोशल माध्यम पर वही दृश्य व्यंग्य बन चुका है। माला लिपटा ट्रांसफार्मर, नीली जाली, ट्रैक्टर पर हरी झंडी। साथ तुलना—किसी के यहां ट्रांसफार्मर का लोकार्पण, किसी के यहां हवाई अड्डा, द्रुतमार्ग और वंदे भारत। संदेश था कि दोनों एक जैसे नहीं। वीडियो घूमा। अब वही बारह सेकंड संसद की बेंच पर भी चल सकते हैं। तब केंद्र कहेगा बड़ी परियोजनाएं हमने दीं। प्रदेश कहेगा आपूर्ति सुधरी है। विपक्ष एक तस्वीर दिखाएगा—आपात की ट्रॉली पर राहुल गांधी की हरी झंडी। बड़ी परियोजना का जवाब छोटी मशीन से कट जाएगा। यही राजनीतिक गणित मुख्य अभियंता की गलती ने सरकार के गले पहना दिया है।सांसद निधि से सामुदायिक संपत्ति देना अवैध नहीं। सवाल वैधता का नहीं, जवाब का है। संसद में पूछा जाएगा—हजारों करोड़ की योजनाओं के बावजूद आपात काल की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं दिखी? राहुल गांधी को अपनी सांसद निधि से क्यों करनी पड़ी? ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा और अपर मुख्य सचिव ऊर्जा तथा विद्युत निगम के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष कुमार गोयल के पास तभी जवाब होगा, जब कागजात खुलेंगे। रायबरेली जोन में इस वर्ष आपात ट्रॉली के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई? विभाग ने कितनी मशीनें स्वयं खरीदीं? कितनी भंडार में पड़ी रहीं, कितनी गांव गईं? सांसद निधि की मशीनें किस आदेश से खरीदी गईं? गृहजनपद पर रोक के बाद कितने पद बढ़ाए गए? मुख्य अभियंता ने ऐलान के कितने दिन पहले लिखित चेतावनी भेजी?अगर ये उत्तर तैयार नहीं हैं, तो संसद में मुख्यमंत्री या ऊर्जा मंत्री के पास एक ही वाक्य बचेगा—विभाग खरीदता है, व्यवस्था है। विपक्ष उसी वाक्य पर हरी झंडी की तस्वीर रख देगा। तब अनुभवहीनता और पद-विस्तारण की कीमत सिर्फ एक अधिकारी नहीं चुकाएगा। प्रदेश की सरकार और केंद्र की सरकार दोनों चुकाएंगी। मंत्री जी और अध्यक्ष महोदय पहले लिख दें—रायबरेली जोन के मुख्य अभियंता को दंडित किया जाए या इनाम दिया जाए? देर हुई, तो इक्कीस लाख की मशीन का सवाल हजारों करोड़ की योजनाओं से भारी पड़ जाएगा। आपात की ट्रॉली विभाग खरीदता है। यह वाक्य भूलने की सजा संसद में मिलेगी। खैर *युद्ध अभी शेष है।
उत्तर रेलवे, लखनऊ मंडलप्रेस विज्ञप्तिदिनांक: 12 सितम्बर, 2026
बाराबंकी स्टेशन पर विशेष टिकट जांच अभियान चलाया गया, 353 मामले पकड़े गए उत्तर रेलवे, लखनऊ मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री समर्थ गुप्ता के निर्देशन एवं सहायक वाणिज्य…
मिल्कीपुर,अमानीगंज,कुचेरा, कुमारगंज, खड़बढ़िया, इनायतनगर इत्यादि जगहों के ग्रामीण की विद्युत व्यवस्था हुई बेहद खराब।
अयोध्या। मेन सप्लाई उपलब्ध होने के बावजूद मिल्कीपुर,अमानीगंज,कुचेरा, कुमारगंज, खड़बढ़िया, इनायतनगर इत्यादि जगहों के ग्रामीण क्षेत्र में घंटों-घंटों तक विद्युत बाधित हो रही है।मेन सप्लाई प्राप्त होने के बाद भी…
