तीन हजार आवेदन, चार सौ चयन… बाकी आवेदक पूछ रहे—‘भाई, हमारी फाइल किस गली में घूम रही है?’

अंबेडकरनगर।
ओडीओपी और पीएम विश्वकर्मा योजना में लाभार्थियों के चयन को लेकर इन दिनों खूब चर्चा है। करीब तीन हजार आवेदक मैदान में उतरे, लेकिन चयन की बारी आई तो लगभग चार सौ नामों पर ही मुहर लगी। अब बाकी आवेदक एक-दूसरे से पूछते नजर आ रहे हैं—“भाई, आवेदन तो हमने भी किया था, कहीं हमारा नंबर अगले जन्म की सूची में तो नहीं है?”
चयन प्रक्रिया को लेकर शिकायतकर्ताओं ने सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि चयन समिति के सभी सदस्यों की मौजूदगी सुनिश्चित किए बिना ही इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी कर दी गई और लाभार्थियों का चयन कर लिया गया। अब सवाल यह है कि समिति पूरी थी या चयन का काम ‘जितने आए, उतने में चलाओ’ वाले फार्मूले से निपटा दिया गया?
युवाओं की कम संख्या में चयन की चर्चा ने बेरोजगारों की बेचैनी और बढ़ा दी है। सरकारी योजनाओं में रोजगार और स्वरोजगार की उम्मीद लेकर आवेदन करने वाले युवाओं के मन में सवाल है कि जब योजना ही युवाओं के लिए है तो चयन सूची में युवा ‘मेहमान कलाकार’ क्यों नजर आ रहे हैं?
इधर मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और एक जनपद एक व्यंजन जैसी योजनाओं को लेकर भी शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। कुछ शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बिना सुविधा शुल्क के फाइल आगे बढ़ना मुश्किल है। इन आरोपों में दिव्या सब का नाम भी लिया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अब मामला जिलाधिकारी ईशा प्रिया तक पहुंच गया है। जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में यह देखा जाएगा कि चयन समिति की भूमिका क्या रही, कौन-कौन सदस्य मौजूद थे और लाभार्थियों के चयन में नियमों का पालन हुआ या नहीं।
फिलहाल आवेदकों की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। तीन हजार आवेदन, चार सौ चयन और बाकी के सवाल—अब जांच बताएगी कि मामला नियमों की किताब के हिसाब से चला या फिर ‘कमेटी आई हो या न आई हो, चयन तो होना ही है’ वाली शैली में।