साप्ताहिक प्रतियोगिता में विषय और विधा के माध्यम से छंद विधान को बढ़ावा

हिंदी काव्य साधना को नई चेतना दे रहा काव्य रस परिवार

साप्ताहिक प्रतियोगिता में विषय और विधा के माध्यम से छंद विधान को बढ़ावा

प्रयागराज : मौलिक सृजन के लिए समर्पित साहित्यिक संस्था काव्य रस द्वारा विगत 14 महीने से हिंदी के लिए काव्य विधा में एक नया आयाम स्थापित कर रही है काव्य रस के संचालक मंडल में सम्मानित कवियों का समर्पण और निष्ठा से काव्य साधना का एक विस्तृत फलक विस्तारित हो रहा है प्रत्येक सप्ताह में चयनित विधा और विषयों पर प्रतियोगिता के माध्यम से श्रेष्ठ रचनाकारों को सम्मान पत्र प्रदान करना और उनकी रचनाओं को काव्य रस परिवार की सहयोगी पत्रिका साहित्यांजलि प्रभा के अंक में भी प्रकाशित करके उन्हें प्रोत्साहित करना काव्य रस परिवार का मुख्य उद्देश्य है छंद विधान को बढ़ावा देने की अनूठी पहल के तहत अब तक 65 प्रतियोगिताएं आयोजित की गई हैं जिसमें शताधिक साहित्यकारों को सम्मान पत्र दिया जा चुका है काव्य रस की ओर से आगामी योजना में बृहद काव्य संकलन का प्रकाशन कवियों का सारस्वत अभिनंदन और काव्य रस के माध्यम से नवोदित कवियों को प्रोत्साहन देने के लिए भी पहल करने की योजना बनाई गई है काव्य रस के संस्थापक एवं निदेशक डॉक्टर भगवान प्रसाद उपाध्याय ने बताया कि इस परिवार में जिन समर्पित साहित्यकारों का अभूतपूर्व योगदान है उनमें डॉक्टर शंभू नाथ त्रिपाठी अंशुल बाबा कल्पेश जी महाराज डॉक्टर त्रिलोकी सिंह जी जगदंबा प्रसाद शुक्ल श्याम नारायण श्रीवास्तव बृजेश पांडेय विभात आलोक मिश्रा मुकुंद आनंद नारायण पाठक अभिनव के साथ साथ डॉ नीलिमा मिश्रा पंडित सुधाकांत मिश्र बेलाला डॉ शरद नारायण खरे रामसुख सफाया अंजोरा पंडित रामजस त्रिपाठी राकेश मालवीय रोशन आदित्य प्रकाश दुबे पथिक डॉ राम लखन चौरसिया डॉ वीरेंद्र कुसुमाकर डॉ राजेंद्र शुक्ला डॉ रसिक किशोर सिंह नीरज मीरा भार्गव सुदर्शना रजनी गुप्ता पूनम चंद्रिका रचना उनियाल डॉक्टर अनिल कुमार शर्मा अनिल श्याम फतनपुरी राजवीर सिंह बलवीर सिंह वर्मा ईश्वर शरण शुक्ला पंडित देवी चरण पांडे चरण आदि अनेक ख्याति लंब कवियों की लंबी श्रृंखला है जो सदैव काव्य साधना में निरत रहते हैं

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