*सर्विस रोड के गड्ढे में कूदी बाइक, अधेड़ महिला गंभीर, जरई कलां | KM 80/600 सर्विस रोड के पास हुआ हादसा*सुल्तानपुर। जनपद सहारनपुर के थाना हलियापुर अंतर्गत हलियापुर से वापस मटियारी की ओर निमंत्रण में जा रहे बाइक सवार उस समय हादसे का शिकार हो गए, जब KM 80/600 के पास सर्विस रोड पर करीब एक फुट गहरा गड्ढा सामने आ गया। गड्ढे में मोटरसाइकिल कूदने से बाइक अनियंत्रित हो गई और पीछे बैठी एक अधेड़ महिला सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं।घायल महिला की पहचान प्रवेश विश्वकर्मा की माता के रूप में हुई है।स्थानीय लोगों के अनुसार उनका नाम रामलली व मटियारी कलां की निवासिनी बताया जा रहा है। हादसे के बाद उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर बताई जा रही है।स्थानीय लोगों ने सर्विस रोड की खराब स्थिति और खुले गड्ढे को लेकर जिम्मेदार विभाग से तत्काल मरम्मत एवं सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।सडक पर इस प्रकार के गड्ढे जानलेवा बने हुए हैं और जिम्मेदार विभाग को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए वर्ना इस प्रकार से तो लोग मौत की गोद में समा जाएंगे।फिलहाल घायल महिला को स्थानीय लोगों व मटियारी के प्रधान पुत्र अभय द्वारा एंबुलेंस के माध्यम से किसी नजदीकी अस्पताल को उपचारार्थ भेजवाया है आगे की जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी है

गणेश चतुर्थी पर राष्ट्रीय बजरंग दल के विभाग प्रभारी विजय कुमार ने झांसीवासियों को दी हार्दिक शुभकामनाएं

(आशिफ खान संवाददाता झांसी) झांसी। विघ्नहर्ता एवं मंगलकर्ता भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर राष्ट्रीय बजरंग दल के विभाग प्रभारी विजय कुमार जी ने झांसीवासियों…

अयोध्या में स्वच्छता को नई सौगात: SBICAP और सुलभ इंटरनेशनल की साझेदारीअयोध्या, रामनगरी अयोध्या में तीर्थयात्रियों और आम जनता के लिए स्वच्छ, सुलभ और गरिमापूर्ण स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है। भारतीय स्टेट बैंक की समूह कंपनी SBICAP Securities Limited ने अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) कार्यक्रम के तहत सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गनाइजेशन (SISSO) के साथ साझेदारी की है।क्या है योजनाइस पहल के माध्यम से अयोध्या के अधिक भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर आधुनिक सुलभ टॉयलेट कॉम्प्लेक्स स्थापित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में विश्वसनीय स्वच्छता अवसंरचना की कमी को पूरा करना है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। प्रत्येक परिसर में प्रतिदिन लगभग 600 से 1,000 उपयोगकर्ताओं – जिनमें पुरुष, महिलाएं, बच्चे, वरिष्ठ नागरिक और दिव्यांगजन शामिल हैं – के आने की संभावना है। सुविधाओं की दिन में तीन बार सफाई और नियमित निगरानी की जाएगी।अधिकारियों ने क्या कहाSBICAP Securities Limited के प्रबंध निदेशक एवं CEO बलदेव प्रकाश ने कहा, “सुरक्षित और गरिमापूर्ण स्वच्छता तक पहुंच प्रत्येक समुदाय के कल्याण के लिए मौलिक है। हमारा मानना है कि CSR को सार्थक और टिकाऊ सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करना चाहिए। हमें अयोध्या में इस पहल में योगदान देने पर प्रसन्नता है।”SISSO की सीनियर वीपी डॉ. लिली गुप्ता और मानद नियंत्रक (उप्र शाखा) फतेह बहादुर सिंह ने कहा, “स्वच्छता केवल शौचालयों के निर्माण तक सीमित नहीं है, यह स्वस्थ समाज के निर्माण और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा बहाल करने के बारे में है। महिलाओं, बच्चों और युवाओं पर विशेष ध्यान देकर हम स्थायी व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देंगे।”स्वच्छ भारत से जुड़ी पहलयह सहयोग स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्यों और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य SDG-6 (Clean Water and Sanitation) के अनुरूप है। इसके साथ ही समुदाय में स्वच्छता और हाइजीन को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि खुले में शौच को हतोत्साहित किया जा सके और जिम्मेदार स्वच्छता व्यवहार को बढ़ावा मिले।

*नागरिक परिक्रमा**(संजय पराते की राजनैतिक टिप्पणियां)**1. फासीवाद का बर्बर भागवत पुराण*क्या अब भी किसी को कोई शक है कि हमारा देश संघी गिरोह की सरपरस्ती में फासीवादी के एक ऐसे नए दौर से गुजर रहा है, जिसकी कल्पना एक नागरिक के रूप में हममें से किसी ने नहीं की थी। संविधान, लोकतंत्र, कायदे-कानून सब एक तरफ धरे रह गए हैं, इनकी जगह संघी गिरोह के मौखिक निर्देशों ने ले ली है। इन निर्देशों पर अमल करने वाला लठैतों का एक गिरोह भी संगठित रूप से काम कर रहा है, जिसकी सत्ता के सभी अंगों तक आसान पहुंच सर्वविदित है। इस पहुंच के बल पर अब वह सरे आम नागरिकों को सजा देने की हिमाकत कर रहा है और न्यायपालिका नाम की संस्था की कोई जरूरत ही नहीं रह गई है। एक नागरिक, एक लेखक, एक रचनाकार, एक चिंतक के रूप में बोलना, लिखना, सोचना, असहमति जाहिर करना, सवाल खड़े करना, अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना — ये सब आज गुनाह है। इसके लिए आप देशद्रोही, राष्ट्रविरोधी, पाकिस्तानी … आदि विशेषणों से नवाजे जा सकते हैं और दंडित किए जा सकते है। अब वही काम सही है, जो सत्ता को सुहाए, उसकी चापलूसी करे, सत्ता में बैठे लोगों की राष्ट्र के नाम पर जयकारे लगाए। फासीवाद को अपनी मुहिम आगे बढ़ाने के लिए नागरिक नहीं चाहिए, आज्ञपालक प्रजा चाहिए, जो उसके दिए खैरात को बिना ना-नुकुर स्वीकार करें और सत्ता का गुणगान करें। जो ऐसा नहीं कर सकता, उसे इस देश में रहने का भी कोई अधिकार नहीं है, नागरिकता भी उससे छीन ली जाएगी। ब्रर्टोल्ट ब्रेख्त ने फासीवाद के बारे में कहा था कि वह अपने लिए जनता भी चुन सकती है। भारत में आज यही हो रहा है। एसआईआर के नाम पर करोड़ों नागरिकों की नागरिकता छीन लिए जाने, उन्हें मताधिकार ही नहीं, राज्य की कल्याणकारी सुविधाओं और उनके बुनियादी नागरिक अधिकारों से भी वंचित कर दिए जाने का वास्तविक खतरा साकार होता हम अपनी आंखों से देख रहे हैं और इस बर्बरता के खिलाफ न्यायपालिका की चुप्पी भी हम देख रहे हैं। कानून के शासन की जगह अब संघी लठैतों ने ले ली है, जो कहीं जन संघर्षों, जन आंदोलनों पर हमला कर रही है, जो कहीं अल्पसंख्यकों पर, तो कहीं पत्रकारों पर और कहीं यात्रियों और पशु-व्यापारियों पर हमले कर रही हैं।फासिस्टों का कोई सगा नहीं होता। वह देश, संस्कृति, धर्म, रिश्ते-नाते सबको ठगकर फलता-फूलता है। वह कट्टरपंथियों की एक ऐसी जमात पैदा करता है, जिसका मकसद ही अब तक की श्रेष्ठ मानव उपलब्धियों को कुचलना होता है। विचारहीनता, अवैचारिकता और अवैज्ञानिकता उसकी विचार प्रक्रिया के अभिन्न अंग होते हैं। विज्ञान और तार्किकता से उसको सबसे ज्यादा चिढ़ होती है, क्योंकि मानव सभ्यता के पास यही एक पूंजी होती है, जो फासीवाद के मकसद को नाकाम कर सकती है।पिछले 60 सालों में हमने जिस लोकतंत्र को विकसित किया, उसमें बहुत-सी कमजोरियां, बहुत-सी बुराइयां थीं। लेकिन संघी गिरोह ने पिछले 12 सालों में जिस फासीवाद को पनपाया है, वह चाहे कितना भी मजबूत हो, मजबूत दिखे, लेकिन एक कमजोर लोकतंत्र का विकल्प नहीं हो सकता। इसलिए कि फासीवाद की पूरी दृष्टि ही मानवद्रोही होती है। वह मनुष्य को, उसकी मेहनत और सृजनात्मकता को केवल कॉर्पोरेटों की तिजोरियों को भरने का साधन समझती है। इसके लिए विमर्श और समावेशिता की सोच और प्रक्रिया को जीवन से बेदखल करने की जरूरत पड़ती है। ‘मोदी चालीसा’ के नाम पर आज यही हो रहा है : जो मोदी कहे, वही सही, बाकी सभी देशद्रोही। ऐसी दृष्टि का लोकतंत्र, समावेशीकरण और देश की एकता की रक्षा के लक्ष्य से कोई संबंध नहीं हो सकता। ऐसी दृष्टि मूल्यांकन भी नहीं कर सकती : न देश का, न जनता का, न अर्थव्यवस्था का, यहां तक कि सत्ता पक्ष का। ये केवल वैचारिक गुलाम होते है। एक विचार उभरता है उस कॉर्पोरेट-शीर्ष से, सत्ता का केंद्र जिसका बंधक है और यह विचार बिना किसी परिवर्धन, संशोधन, विमर्श और आलोचना के एक तीखे दुर्गंध के रूप में पूरे देश में फैलाकर बताया जाता है कि यही सुगंध है, इसे स्वीकार करो। जो इसके लिए तैयार नहीं है, वह इसी के साथ जीने को अपनी मजबूरी समझे। यही हिंदुत्व है, जिसका वास्तव में भारतीय विचार परंपरा और चिंतन के साथ कोई संबंध नहीं है। इस हिंदुत्व का असली उद्देश्य सत्ता के साथ गलबहियां करना है और अपने कॉर्पोरेट मित्रों को लाभ पहुंचाना है। इसके लिए विचारहीनता का संजाल बुनना जरूरी होता है।दुनिया में बर्बरता रही है और लूट भी है। लेकिन मानव सभ्यता कभी भी इसके पक्ष में नहीं रही है, उल्टे वह इसके खिलाफ़ लड़कर ही विकसित हुई है। भारत भी इसका अपवाद नहीं है। बर्बरता और लूट के खिलाफ जमीनी और वैचारिक संघर्ष जारी रहेगा और कोई तटबंध इस विचार प्रवाह को बांधकर नहीं रख सकता। फासीवाद के मानवद्रोही दृष्टि पर लोकतंत्र की उदार मानवपेक्षी दृष्टि ही विजयी होगी, जेन-ज़ी और जेन-अल्फा का उभरता संघर्ष इसी बात का संकेत है। संघी गिरोह के सरदार मोहन भागवत ने अमेरिका में जो प्रवचन दिया है, उससे भी यही बात साबित होती है कि विश्व बंधुत्व के विचारों पर नफरत का कोई भी विचार हमेशा के लिए हावी नहीं हो सकता। यह अलग बात है कि विवेकानंद बनने की कोशिश में ‘भागवत-प्रवचन’ हाथी का दिखने वाला दांत ही साबित हुआ है। भागवत की अमेरिका में कथनी से उनके संघी गिरोह की भारत में एकदम उल्टी करनी पूरी दुनिया देख रही है।******2. प्रधानमंत्री जन धन योजना की खुली पोल*आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ को धन्यवाद देना चाहिए कि फर्जी जीडीपी वृद्धि के शोर के बीच उन्होंने प्रधानमंत्री जन धन योजना की पोल खोल कर रख दी है। उन्हें आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, 12 अगस्त 2026 की स्थिति में देश भर में कुल 59,03,74,907 जन धन खाते थे। लेकिन 5,72,35,490 जन धन खातों में कोई बैलेंस नहीं है और 15,36,77,009 खाते निष्क्रिय हैं, याने इनमें लंबे समय से कोई लेन-देन नहीं हुआ है। इन आंकड़ों के साथ थोड़ा-सा गुणा-भाग कर लें, तो हम पाएंगे कि निष्क्रिय खातों सहित जिन खातों में रकम जमा है, उनमें भी औसतन 6000 रूपये से ज्यादा की राशि जमा नहीं है।मोदी के वर्ष 2014 से सत्ता में आते ही यह बहुमहत्वाकांक्षी योजना शुरू की गई थी, जिसका मुख्य मकसद आम जनता को बचत के लिए प्रोत्साहित करना तथा उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजना से जोड़ना था। ये आंकड़ें बताते हैं कि यह योजना, नोटबंदी की तरह ही, अपने दोनों उद्देश्यों को प्राप्त करने में विफल रही है। इस योजना के तहत आम जनता को, शून्य बैलेंस पर जनधन खाते खोलने की सुविधा दी गई थी। 59 करोड़ से ज्यादा खाते खुलने का अर्थ है कि हमारे देश की वयस्क आबादी के बहुत बड़े हिस्से को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया। इन आंकड़ों के सहारे गोदी मीडिया में मोदी सरकार ने देश के विकास के भारी-भरकम दावे भी किए थे। लेकिन आंकड़ों से साफ है कि विकास के दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। पिछले 12 सालों में करोड़ों लोगों की कुल बचत 6000 रूपये से ज्यादा नहीं है, यानी साल भर में वे मुश्किल से 500 रूपये भी नहीं बचा पाते। कुल मिलाकर, प्रति व्यक्ति बचत लगभग शून्य ही है। अर्थशास्त्रीय नजरों से देखें, तो जीडीपी में वृद्धि के साथ ही प्रति व्यक्ति बचत भी बढ़ना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। न बचत हुई, न लोगों का जीवन स्तर ऊंचा हुआ। किसानों और मजदूरों के हर साल बढ़ रहे आत्महत्या के आंकड़ें बताते हैं कि मामला ठन-ठन गोपाल है या ‘ऋणम् कृत्वा घृतम् पीबेत’ का है। इसका साफ अर्थ है कि या तो जीडीपी के आंकड़े गलत है या विकास लोगों तक पहुंच नहीं रहा है।लेकिन दोनों ही निष्कर्ष सही है। वे अर्थशास्त्री भी, जो कभी सरकार से जुड़े थे, जीडीपी के आंकड़ों को तथ्यों के साथ चुनौती दे रहे हैं। मोदी सरकार का दावा है कि “2023-24 से 2026-27 तक की चार साल की अवधि में यह पहली तिमाही की सबसे ज़्यादा वास्तविक जीडीपी विकास दर है।” लेकिन वे बता रहे हैं कि जिस कदर जीडीपी गणना का फर्जीकरण किया गया है, उसे हिसाब में लिया जाएं, तो इस वर्ष की पहली तिमाही की जीडीपी 2.6 प्रतिशत से ऊपर नहीं बैठती। यह जीडीपी भी देश की आम जनता के हाथ में नहीं पहुंची है, बल्कि कॉर्पोरेट-तिजोरी में कैद हो गई है। यही कारण है कि आज भारत में आय और संपत्ति की असमानता पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है। इस असमानता के आंकड़ों को दुहराने की जरूरत नहीं है, केवल यही याद रखना काफी है कि मोदी सरकार के आंकड़ों के हिसाब से ही, देश की 80 करोड़ जनता 5 किलो मुफ्त राशन पर जिंदा है, इसके बावजूद सार्वजनिक वितरण प्रणाली में कटौती जारी है। आज देश की आधी आबादी, अपने बच्चों और महिलाओं की बड़ी संख्या के साथ, भुखमरी और कुपोषण का शिकार है। सरकारी जीडीपी ने उनकी किस्मत की रेखाओं को बदला नहीं है। जीडीपी से जुड़कर रोजगार, औसत मजदूरी और निवेश बढ़ने की भी यही हकीकत है कि बढ़ा कुछ नहीं है, सर्वनाश चौतरफा है। जब सरकार की आखिरी सांस चल रही होती है, तो तमाम फुलाए गए गुब्बारे भी फूटने लगते हैं। चलाचली की बेला में मोदी सरकार के साथ भी यही हो रहा है।*(टिप्पणीकार अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं। संपर्क : 94242-31650)*

अयोध्या (नगर पंचायत भरतकुंड /भदरसा)भरतकुंड में भ्रष्टाचार की आवाज उठाने महंत परमात्मा दास को मिल रही धमकी ,उन्होंने वीडियो बयान में कहा मुझे कुछ हुआ तो चेयरमैन और ई ओ नगर पंचायत होगा जिम्मेदारनगर पंचायत भरतकुंड भदरसा में एक बार फिर भरतकुंड मंदिर के महंत परमात्मा दास ने कहा नगर पंचायत में बहुत भ्रष्टाचार है जिसकी आवाज मै बराबर उठा रहा हूँ वही सरकारी पद का दुरुपयोग कर पदो का दुरुपयोग का जनता के टैक्स का पैसा सरकार का पैसा गलत नीतियां बनाकर उड़ाया जा रहा है सनातन के कार्य के लिए नगर पंचायत कुछ नहीं करती वहीं जहां कोई आबादी नहीं है पचासों पेड़ो को तोड़कर सरकारी तालाब के पेड़ तोड़ कर मोर एवं पक्षियों को बेघर कर किसी को व्यक्ति लाभ पहुंचाए के लिए सरकारी व्यस्था एवं धन का दुरूपयोग कर रही है वही मामले में महंत परमात्मा दास ने बताया कि उन्हें चेयरमैन द्वारा बराबर धमकियां मिल रही है अगर उन्हें कुछ होता है तो उसके जिम्मेदार चेयरमैन नगर पंचायत और ई ओ नगर पंचायत होंगेवही मामले में नगर पंचायत ईओ ने बताया सारे तालाब पर चल रहे कार्य रोक दिए गए है मेरे द्वारा कोई पेड़ भी तोड़वाया गया न ही जे सी बी चलाने की अनुमति दी गई जिसमें ये कृत्य किया गलत किया ओ जाने उसकी कार्यवाही से मेरा कोई लेना देना नहीं राजस्व टीम माप करेगी यदि जमीन तालाब की है तो फर्जी प्रस्ताव देने वाले सभासद के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी——————————–

मिल्कीपुर , अयोध्या।सर्पदंश से निवासी पारा ताजपुर 40 वर्षीय सेलून संचालक मुकेश शर्मा पुत्र स्व. हरिलाल शर्मा की हुई थी मौत, सोमवार को मिल्कीपुर विधायक चंद्रभानु पासवान ने पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर संवेदना जताई। विधायक ने मृतक के आश्रितों को चार लाख रुपये का चेक प्रदान किया। इस दौरान मिल्कीपुर एसडीएम पवन कुमार शर्मा और खंड विकास अधिकारी रूप नारायण भारती भी मौजूद रहे। बीते मंगलवार और बुधवार की दरम्यान रात करीब 1:30 बजे जहरीले सांप के डसने से मुकेश शर्मा की हालत बिगड़ गई थी। परिजन उन्हें तत्काल जिला अस्पताल अयोध्या ले गए, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी।

थाने के अंदर भिड़े सिपाही, लात घूंसे चलें’

बाराबंकी के बड्डूपुर थाने में 2 पुलिसकर्मियों में जमकर लात घूसे चलें. एक सिपाही ने दूसरे को लिटा लिटा कर पीटा. मारपीट CCTV कैमरे में कैद हो गई. करीब 2…

*8 साल में अगर 8 रुपए का काम हुआ हो तो बता दो…..*UP: आगरा में भाजपा विधायक बाबूलाल के बेटे चौधरी रामेश्वर ने भाजपा सांसद राजकुमार चाहर पर सांसद निधि और हर घर नल योजना को लेकर कहा कि 8 साल में सांसद निधि से 8 रुपये का काम हुआ हो तो बता दें। 2026 में भी गांवों की टोंटी से पानी नहीं आया। फिरोजाबाद से आगरा पानी लाने वाली पाइपलाइन अधूरी बताई गई। कमीशन के चक्कर में पहले पाइपलाइन डालने का आरोप लगाया। गली-गली खुदाई से माताएं, बहनें, बच्चे और बुजुर्ग परेशान हुए।

उत्तर प्रदेश: ₹20 के नकली सिक्के बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 5 गिरफ्तारसहारनपुर पुलिस ने ₹20 के नकली सिक्के बनाने वाले कथित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह अब तक 70 करोड़ रुपये से अधिक कीमत के नकली सिक्के बाजार में खपा चुका है।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उपकार लूथरा, हिमांशु उर्फ गुल्लू, कुलदीप, संतोष चौरसिया और अनुराग पाल के रूप में हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह नकली सिक्कों को किन माध्यमों से बाजार में पहुंचाता था और इसके पीछे और कौन लोग शामिल हैं।

*हनुमानगढ़ी और रामलला के दरबार पहुँचे अभिनेता कबीर दुहन सिंह, संतों से लिया आशीर्वाद*डॉ अंशुमान सिंह​अयोध्या,अपनी दमदार अदाकारी और जलवे से पर्दे पर छाप छोड़ने वाले प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता कबीर दुहन सिंह पवित्र रामनगरी अयोध्या पहुँचे। यहाँ उन्होंने सबसे पहले सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी में माथा टेका और महाबली हनुमान जी का दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने राम जन्मभूमि परिसर में प्रभु श्री रामलला के दर्शन कर देश व समाज की समृद्धि की कामना की। इस दौरान अभिनेता ने अयोध्या के पूज्य संतों का भी आशीर्वाद लिया।​अयोध्या की पावन माटी पर पहुँचकर गदगद हुए अभिनेता कबीर दुहन सिंह ने मीडिया से बातचीत में अपना अनुभव साझा किया।मैं एक मीटिंग के सिलसिले में लखनऊ आया हुआ था। लखनऊ में होने के बाद यह मुमकिन ही नहीं था कि मैं हनुमान जी के दर्शन किए बिना लौट जाऊँ—चाहे दूरी 200 किलोमीटर हो या 300 मीटर! मैं पिछले महीने भी यहाँ दर्शन के लिए आया था। अयोध्या आते ही मन और हृदय को जो असीम शांति और खुशी मिलती है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। हनुमान जी की कृपा लेकर अब मैं राम जी के पावन दर्शनों के लिए आगे बढ़ रहा हूँ। *फिल्म प्रोजेक्ट्स और ‘हनुमान अंश’ पर बोले अभिनेता*अयोध्या और राम जी पर आधारित किसी फिल्म प्रोजेक्ट के सवाल पर कबीर दुहन सिंह ने कहा कि कुछ योजनाओं पर काम चल रहा है, जिसे वे जल्द ही सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने बताया कि हाल ही में हुई उनकी बैठकें काफी सफल रही हैं,फिल्म ‘हनुमान अंश’ (नीम करोली बाबा पर आधारित) की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआत में धीमी प्रतिक्रिया के बाद अब माउथ पब्लिसिटी के दम पर लोग इसे सिनेमाघरों में खूब पसंद कर रहे हैं। अंत में उन्होंने “राम-राम, सीताराम” कहकर सभी का आभार जताया।*​भक्ति के रंग में रंगे नज़र आए कबीर*दर्शन-पूजन के दौरान कबीर दुहन सिंह पूरी तरह भक्ति रस में डूबे दिखाई दिए। संतों ने उन्हें अंगवस्त्र और प्रसाद भेंट कर अपना स्नेहाशीष दिया। अभिनेता के अयोध्या आगमन की खबर मिलते ही उनके प्रशंसक भी बेहद उत्साहित नज़र आए।